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Raipur. रायपुर। कांग्रेस नेता को लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर धमकी देकर 25 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में आरोपी शोएब ढेबर की गिरफ्तारी को लेकर रायपुर पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। सीजेएम कोर्ट से गिरफ्तारी की अनुमति मिलने के बाद पुलिस टीम ने बुधवार को शहर के आधा दर्जन से अधिक ठिकानों पर दबिश दी। फिलहाल आरोपी की तलाश जारी है। पुलिस की टीमों ने बैरनबाजार स्थित अनवर ढेबर के निवास, शंकर नगर स्थित पाल्म बेलाजियो अपार्टमेंट और फाफाडीह के होटल वेलिंगटन कोर्ट समेत कई स्थानों पर छापेमारी की। पुलिस संभावित ठिकानों के साथ आरोपी से जुड़े लोगों की गतिविधियों की भी जानकारी जुटा रही है।
मामला तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार 14 सितंबर को प्रार्थी आनंदमल कुकरेजा के मोबाइल पर विदेशी नंबर से व्हाट्सऐप के जरिए धमकी भरे संदेश भेजे गए थे। संदेश भेजने वाले ने कथित तौर पर खुद को अमन साहू गैंग से जुड़ा बताया और 25 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की। शिकायत के मुताबिक रकम नहीं देने पर प्रार्थी, उसके बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों को जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। इसके बाद तेलीबांधा थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच की जिम्मेदारी एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और तेलीबांधा पुलिस को दी गई। तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल इनपुट के आधार पर पुलिस ने मामले की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं। इसी जांच के दौरान रविवार को शोएब ढेबर को पकड़ा गया था। पुलिस के मुताबिक उसके कब्जे से घटना से जुड़े पांच आईफोन जब्त किए गए थे। इन मोबाइल फोन की कुल कीमत करीब पांच लाख रुपये बताई गई है। जब्त मोबाइलों की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि धमकी भरे संदेश भेजने और रंगदारी मांगने में किन उपकरणों और नंबरों का इस्तेमाल किया गया।
पुलिस ने शोएब ढेबर को रिमांड कोर्ट में पेश किया था। वहां से उसे स्वतंत्र करने की अनुमति दी गई। इसके बाद पुलिस ने मामले से जुड़े तकनीकी और अन्य साक्ष्य नियमित अदालत के सामने रखे और मंगलवार को दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति मांगी। सीजेएम कोर्ट ने पुलिस के आवेदन को स्वीकार करते हुए गिरफ्तारी की अनुमति दे दी। इसके बाद से पुलिस ने शोएब ढेबर की तलाश तेज कर दी है। अलग-अलग टीमों को संभावित ठिकानों पर भेजा गया है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि धमकी देने वाले विदेशी नंबर का वास्तविक इस्तेमाल किसने किया और उसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े थे। रंगदारी मांगने के लिए जिस गैंग का नाम लिया गया, उससे आरोपी का कोई वास्तविक संबंध है या केवल डर पैदा करने के लिए गैंग का नाम इस्तेमाल किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है। मामले में तकनीकी साक्ष्य महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। जब्त मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, इंटरनेट डेटा और मैसेजिंग एप से जुड़ी जानकारी के आधार पर पुलिस पूरे नेटवर्क की पहचान करने में जुटी है। फिलहाल शोएब ढेबर पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। सीजेएम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और संभावित ठिकानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में रंगदारी की साजिश और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका को लेकर और जानकारी सामने आ सकती है।
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